GALE गाला APPLE WILL BE A REVOLUTION IN THE SELF POLLINATION VARIETIES

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RED LUM GALA (2) RED LUM GALA

गेल गाला यह सेल्फ पोलीनाइजर यह वैरायटी नियमित रूप से फल देती है। गाला के प्रति चौहान के जुनून का उदाहरण देखिए कि उन्होंने इसके लिए रॉयल प्रजाति के 30 साल से अधिक की आयु के कई पेड़ काट दिए और उनकी जगह गेल गाला लगाया। वे इस समय गेल गाला के अलावा इसी किस्म की चार अन्य प्रजातियों पर काम कर रहे हैं। इनमें रेडलम, बुकाय, मिशेल, फिंगल, ब्रुकफील्ड, रॉयल व स्कारलेट गाला शामिल हैं। कई खूबियों के बावजूद गाला किस्म में एक दिक्कत आती है। वह परेशानी यह कि सेब अधिक लगने के बाद इनका साइज प्रभावित होता है। ऐसे में इनकी थिनिंग करनी पड़ती है। इसमें पाउडरीमिलड्री की शिकायत भी आती है। इसके लिए मई माह में माइक्रोबुटानिल की स्प्रे करनी चाहिए।
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चूंकि गेल गाला सेल्फ पोलीनाइजर वैरायटी है, लिहाजा यह बागीचों में पोलीनेशन का काम भी करती है। इसके लिए जरूरी यह है कि बागीचे में गेल गाला के पौधों की संख्या अन्य स्पर वैरायटियों की 35 फीसदी होनी चाहिए। स्पर की यदि बागीचे में नई प्लांटेशन की जा रही हो तो दो लाइनों के बाद तीसरी लाइन पूरी तरह से गेल गाला की लगाएं। गेल गाला चट्टानी जगह में भी इसकी ग्रोथ अच्छी है। कुछ-कुछ पथरीली भूमि पर गेल गाला अधिक मिट्टी वाली भूमि से अधिक अच्छा फलता है। बाजार में पिछले तीन साल से चीन के फ्यूजी सेब की धमक के बाद रेड गोल्ड की डिमांड कम हुई है। ऐसे में फ्यूजी को टक्कर देने के लिए गेल गाला ही कारगर है। तभी फ्यूजी किस्म को पीछे धकेला जा सकता है। अब समय नई वैरायटियों का है। पुरानी किस्मों को अलविदा कहते हुए विदेशी किस्मों को उगाना ही समझदारी है। इस साल यानी वर्ष 2014 – 2015 में गेल गाला इस सेब की क्वालिटी इतनी बेहतर थी कि अहमदाबाद और जयपुर की मंडियों के कारोबारियों ने उनके बागीचे में ही आकर सेब खरीदा है। दाम सुनकर चौंकने की तबीयत होती है।2014 – 2015 दाम मिल रहे हैं-140 रुपए प्रति किलो।
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