टंग ग्राफटिंग ;-

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टंग ग्राफटिंग ;- फरवरी -मार्च के महीने में किया जाता है। जिन रूट स्टॉक का आकार पेंसिल के लगभग मोटा हो उन पर इस विधि का प्रयोग करें। साइन को मिट्टी के गड्ढे या शीत गृह से निकाल कर अच्छी तरह ले व 7-8 सैझ्मीझ् लम्बे टुकड़ों में 3-4 आंखें सहित काट लें। ग्राफटिंग करने से पहले संकुर टुकड़ो को फफूंद नाशक से उपचारित किया जाए तो कई प्रकार की बिमारियो से बचा जा सकत है। जिब्हा लगाने के लिए स्टॉक में 3-4 सैझ्मीझ् लम्बा व तिरछा कट नीचे से ऊपर इस तरह लगाएं कि लकड़ी सहित सारा भाग अलग हा जाए
तिरछे कटे भाग के बीच में सीधा नीचे की ओर 2.5-3 सैझ्मीझ् चीरा लगाकर जिब्हा बनाये। उसी प्रकार सांकुर भाग पर भी चीरा लगा कर जिब्हा बना लें अब सांकुर को स्टॉक के ऊपर जमीन से 20-22 सैझ्मीझ् ऊपर लगाएं। जोड़ को प्लास्टिक की एक ईंच् चैडी टेप से अच्छी तरह बांध दें ताकि उसमें पानी अंदर न जा सके यदि सांकुर स्टॉक से थेड़ा बारीक हो तो उसे इस तरह से स्टॉक पर फिट बिठाए कि कम से कम एक तरफ की छाल आपस में अवश्य मिले । मिट्टी में उचित नमी बनाये रखे। 15-20 दिनों के उपरान्त सांकुर में कोपलें निकलनी शुरू हो जाता हैं।
ग्राफटिंग का कार्य खेत में न करके रूट स्टॉक को उखाड़ कर एक स्थान पर बैठ कर भी किया जा सकता है इसे बैंच ग्राफटिंग कहते हैं। इस कार्य में पहले जो स्टॉक ग्राफटिग करने योग्य हो गया हो उसे खेत से निकाल लेते हैं फिर उस पर जिब्हा उपरोपण करके उसे नई क्यारियों में 20 सैझ्मीझ् की दूरी पर पंक्तियों में लगाए तथा पंक्ति से पंक्ति की दूरी 30 सैझ्मीझ् रखें।

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