स्वाद की दुनिया में ब्लैक एंबर की धूम, शिमला की ढली मंडी में

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एप्पल स्टेट हिमाचल के बागीचों में पैदा जापानी किस्म का ब्लैक एंबर प्लम स्वाद की दुनिया में धूम मचाने को तैयार है। शिमला जिला के बागवानों द्वारा पैदा किए जा रहे इस प्लम की पहली खेप मार्केट में आ गई है122 रुपये किलो बिका जापानी प्लमअपने बेहतरीन स्वाद के कारण ये फल देश के महानगरों व फाइव स्टार होटलों में खासा पसंद किया जाता है। स्वाद व क्वालिटी में उत्तम जापानी ब्लैक एंबर प्लम बुधवार को शिमला की लोकल मार्केट में रिकार्ड 122 रुपये प्रति किलो के हिसाब से बिका। इस प्लम की 1.80 किलोग्राम की पेटी 220 रुपये की दर से बिकी। यहां से ये प्लम सीधे हैदराबाद, मुंबई, चेन्नई सहित देश के अन्य महानगरों में भेजा जाएगा। इस प्लम की खासियत इसकी शेल लाइफ है। ये लंबे समय तक खराब नहीं होता। इसके अलावा प्लम की अन्य किस्में जल्दी खराब हो जाती हैं। यही कारण था कि देश के महानगरों में फल खाने के शौकीन लोग प्लम के स्वाद से वंचित रहते थे। अब जापानी किस्म का ब्लैक एंबर प्लम लंबे समय तक खराब न होने के कारण आसानी से देश की मार्केट में पहुंच जाता है। ये महंगा फल है, लिहाजा शिमला की मंडियों में आने के बाद इसे जल्द देश की बड़ी मंडियों में भेज दिया जाता है। जिला शिमला में कोटखाई तहसील के बखोल गांव में स्थित आरएमएस आर्चर्ड के बागीचों से आए इस प्लम ने मार्केट में धूम मचा दी है। आरएमएस आर्चर्ड में इस किस्म का प्लम दो साल पहले लगाया गया था।

आरएमएस आर्चर्ड के मालिक आत्माराम चौहान के अनुसार उनके बागीचे में इस किस्म के प्लम की ये दूसरी पैदावार है। कोटखाई के अलावा इस समय ये प्लम कोटगढ़, कुमारसैन व किन्नौर के कुछ इलाकों में भी पैदा किया जा रहा है। सेब उत्पादन के अतिरिक्त ब्लैक एंबर प्लम भी बागवानों की आर्थिक किस्मत को बुलंद कर सकता है। आत्माराम चौहान का कहना है कि बागवानों के सेब के अलावा अन्य फलों के उत्पादन पर भी साथ-साथ ध्यान देना चाहिए। ढली मंडी के कारोबारी सुशील ठाकुर जो जीएसटी फर्म के नाम से आढ़त चलाते हैं, ने बताया कि ब्लैक एंबर की कीमत काफी अधिक है। जापानी किस्म का ये प्लम चूंकि महंगा है, लिहाजा इसे देश के बड़े नगरों में ही भेजा जाता है। सुशील ठाकुर के अनुसार ये फल फाइव स्टार होटलों की फ्रूट बॉस्केट में ग्राहकों के लिए विशेष तौर पर पेश किया जाता है। उल्लेखनीय है कि शिमला जिला में हिमाचल का सबसे अधिक सेब उत्पादन होता है। समूचे हिमाचल में सेब उत्पादन का साठ फीसदी शिमला में होता है। अब शिमला जिले के बागवान अन्य फलों पर भी फोकस कर रहे हैं। प्लम के अलावा नाशपाती व प्रून आदि फल लगाते हैं। प्रून एक अमेरिकी किस्म का फल है। ये भी प्लम की एक किस्म है। इस किस्म का फल जुलाई महीने में मार्केट में आएगा।

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