रूट स्टॉक की जानकारी जरूरी:

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हिमाचल में जगह की कमी के कारण बागीचों के लिए भूमि की सीमित उपलब्धता है। इस कारण रूट स्टॉक पर सघन बागवानी समय की जरूरत है। चीन व अमेरिका जैसे अग्रणी देश सारा काम रूट स्टॉक पर ही करते हैं। इसी वजह से वहां सेब उत्पादन रिकार्डतोड़ होता है। हिमाचल को भी रूट स्टॉक को अपनाना जरूरी है।
रूट स्टॉक पर भी पौधों को बड़ा बनाया जा सकता है। यह धारणा सही नहीं है कि रूट स्टॉक पर तैयार किए गए पौधे बड़े नहीं होते। कम ढलान व ठंडे इलाकों में अधिक बीमों वाली प्रजाति के सेब के पौधे लगाने के लिए एम-07 व एम-106 रूट स्टॉक का इस्तेमाल किया जाना चाहिए। इसमें पौधों की दूरी तीन मीटर हो तथा पौधे एक सीध में कतार में लगे हों। ऊंचाई वाले इलाकों में एम-07 व एम-111 रूट स्टॉक भी लगाया जा सकता है।
ड्वारफ रूट स्टॉक में एम-09, सेमी ड्वारफ में एमएम-106, विगरस श्रेणी में एमएम-111 व एमएम106, एमला सीरिज में एम-26, एमला-09 व एमला-111 व एमला-07 पर पौधे तैयार करने चाहिए।
नाशपाती भी रूट स्टॉक पर तैयार करनी चाहिए। अभी हिमाचल में कैंथ पर नाशपाती तैयार की जाती है। समय की मांग यह है कि नाशपाती भी क्वींस रूट स्टॉक पर तैयार की जानी चाहिए। इससे पौधा छोटा रहता है और फल भी जल्दी देता है।1176_mulchtree

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