यूरिया की जानकारी जरूरी

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बागीचों में मिट्टी में नाइट्रोजन की कमी को पूरा करने के लिए विशेषज्ञों ने यूरिया के इस्तेमाल का सुझाव दिया है। फल देने वाले पौधे में एक किलो यूरिया डाला जा सकता है। मार्च माह में इसका प्रयोग किया जा सकता है। एक किलो यूरिया का प्रयोग बागीचे की स्थिति के अनुसार एक बार में ही या फिर किश्तों में भी किया जा सकता है। इसके साथ एक किलो चूने का प्रयोग भी करना चाहिए। यूरिया में 46 फीसदी नाइट्रोजन होता है। यूरिया मिट्टी की नेचर को एसिडिक बनाता था, इस कारण बागवानों ने इसका प्रयोग बंद किया था, परंतु वैज्ञानिक यह सुझाते हैं कि चूने के प्रयोग से एसिडिक नेचर खत्म होती है और पौधे को नाइट्रोजन का पूरा पोषण मिलता है।
यदि मिट्टी परीक्षण में भूमि का एसिडिक 5 से 6 मानक का है तो यूरिया के साथ चूना लगाना बेहद जरूरी है। अगर पीएच 6.5 से लेकर 7 से अधिक है तो यूरिया के साथ चूने के प्रयोग की जरूरत नहीं है। यूरिया दाम में सस्ता है। इसे बागवान बेहिचक प्रयोग कर सकते हैं। एक किलो यूरिया के जरिए एक पौधे की नाइट्रोजन की 700 ग्राम की मात्रा पूरी हो जाती है।

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