चिप बडिंग एक, लाभ अनेक

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चिप बडिंग एक, लाभ अनेक
सेब व अन्य फलों के उत्पादन में चिप बडिंग का प्रयोग करने के कई लाभ हैं। चिप बडिंग एक ऐसी तकनीक है, जिसमें किसी पौधे से एक टहनी लेकर उससे एक आंख ली जाती है। उस आंख को किसी टहनी या रूट स्टॉक पर चिप बडिंग के जरिए लगाया जा सकता है। चिप बडिंग साल के किसी भी मौसम में कर सकते हैं।
यदि बागवानों के पास साइनवुड कम हैं, ऐसी स्थिति में बागवान चिप बडिंग से अधिक से अधिक संख्या में पौधों की ग्राफ्टिंग कर सकते हैं। चिप बडिंग साल में जिस समय भी उपलब्ध हो, उसे बागीचे में लगाया जा सकता है।
चिप बनाने के लिए एक टहनी को लेकर उसकी आंख से थोड़ा ऊपर कट लगाकर चाकू को उल्टा कर दें। चाकू को उल्टा कर टहनी के ऊपर की तरफ कट लगा लें। इससे चिप निकल आएगी। इससे पहले पौधे के तने पर टी-आकार का कट लगाएं। पौधे की टहनी से निकाली गई चिप को टी-आकार के कट में डालकर उसे ग्राफ्टिंग टेप से बांध लें। यदि चिप बडिंग सर्दी के दौरान यानी अक्टूबर-नवंबर में की गई हो तो आंख को पूरी तरह से लपेट कर बांध लें। यदि यह प्रक्रिया जुलाई में की जाए तो आंख को खुली रखा जा सकता है।
अक्टूबर-नवंबर में की गई चिप बडिंग को फरवरी व मार्च में खोला जा सकता है। इस बडिंग से ग्रोथ अधिक होती है। टंग ग्राफ्टिंग के मुकाबले चिप बडिंग अधिक फायदेमंद है। चिप बडिंग में ग्रोथ टंग ग्राफ्टिंग से अधिक होती है। इसका जोड़ टंग ग्राफ्टिंग से अधिक मजबूत होता है। साइनवुड कम होने की सूरत में भी चिप बडिंग से अधिक पौधों की बडिंग का लाभ लिया जा सकता है।

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