चार पलम की प्रजातियों को लगाने की सिफारिश की जाती है

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1. रैड ब्यूट: फल मध्यम आकार के ग्लोब की तरह लाल एवं चमकीली त्वचा वाले, गूदा लाल, पिघलने वाला, मीठा एवं सुगंधित व गुठली चिपकी रहने की प्रवृति वाला सैटांरोजा से दो सप्ताह पहले पक कर तैयार, पौधे ओजस्वी, मध्यम आकार के एवं निमित फल धारण करने वाले होते है।

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2. सैटां रोजा: इस किस्म के फल बड़े एवम बैंगनी रंग के होते हैं। फलों में शर्करा की मात्रा अधिक होती है तथा ये बड़े स्वादिष्ट होते ह ैं। फलों में गुलाब जैसी गन्ध होती है फलत: नियमित तथा अधिक होती है। फल जून के द्वितीय सप्ताह से तृतीय सप्ताह तक पकते हैं।
3. फ्रटियर: फल सैटारोजा से भारी और आकार में बड़ा, छिल्का गहरा लाल बैंगनी, गूदा गहरे लाल रंग का, मीठा, स्वादिष्ट, सख्त, एकसा मीठा, सुगंधित व गुठली से अलग होने वाला फल भण्डारण की अधिक क्षमता तथा जून के अन्तिम सप्ताह (सैंटारोजा से 10-12 दिन बाद) पककर तैयार पैदावार अधिक पौधा ओजस्वी सीधा उपर की ओर बढऩे वाला अधिक फलन के लिए परपरागण की आवश्यकता इसके लिए सैंटारोजा अच्छी किस्म है।

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4. मैरीपोजा: इस किस्म के फल फ्रटियर से भी आकार व भार में बड़े होते हैं। फलों की आकृति हृदयकार होती है। फलों का रंग हल्का हरा तथा फलों पर छोटे-छोटे चिते होते हैं। फल बड़े स्वादिष्ट होते हैं तथा गूदे कारंग तरबूज जैसा होता है। गुठली गूदे से जल्दी अलग हो जाती है। फल जुलाई के तृतीय सप्ताह में पकते हैं। पौधा ओजस्वी सीधा ऊपर की ओर बढऩे वाला अधिक पैदावार के लिए परागण की आवश्यकता हेाती है। इसके लिए सैटारोजा अच्छी परागण किस्म हैं।

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