एप्पल स्टेट हिमाचल में सेब का सफर इस सीजन से सौंवें साल में प्रवेश कर गया है।

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शिमला। इस समय देश की बड़ी मंडियों से होता हुआ हिमाचल का ताजा सेब पांच सितारा होटलों और घरों की फ्रूट बॉस्केट में सज रहा है। सेब खाने के शौकीन लोगों को भी शायद ही इस बात का इल्म होगा कि एप्पल स्टेट हिमाचल में सेब का सफर इस सीजन से सौंवें साल में प्रवेश कर गया है।
शिमला जिला की पहाडिय़ों में बसे कोटगढ़ के गांव बारूबाग में एक अमेरिकन सैमुअल स्टोक्स ने सेब का पहला पौधा 1918 में लगाया था। भारतीय दर्शन से प्रभावित सैमुअल स्टोक्स बाद में सत्यानंद स्टोक्स हुए। उनके प्रयासों से हिमाचल के संघर्षशील व साधनहीन मनुष्यों के जीवन में आर्थिक क्रांति आई और इस समय हिमाचल के बागवान संपन्न व खुशहाल हैं। प्रदेश में चार लाख बागवान परिवार हैं। सेब उत्पादन यहां के लाखों लोगों की आजीविका है। कहा जा सकता है कि इस छोटे पहाड़ी राज्य हिमाचल की खास पहचान सेब से है। यहां मौजूदा समय में सेब का सालाना चार हजार करोड़ रुपए का कारोबार होता है। परंपरागत रॉयल किस्म के साथ-साथ यहां अब विदेशी किस्म के सेब भी खूब पैदा किए जाते हैं।

अमेरिका, इटली, न्यूजीलैंड, चीन की सेब किस्में हिमाचल में सफलता से उगाई जा रही हैं। हिमाचल की विभिन्न सरकारों ने भी बागवानी को बढ़ावा देने के प्रयास किए। फलस्वरूप हिमाचल प्रदेश में 2.25 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में फल पैदा होते हैं। यदि वर्ष 1950-51 का आंकड़ा देखा जाए तो उस समय राज्य में महज 792 हेक्टेयर क्षेत्र बागवानी के अधीन था।
इसी प्रकार, वर्ष 1950-51 में फलों का उत्पादन केवल 1200 टन था, जो आज बढक़र 8.19 लाख टन तक पहुंच गया है। यहां सेब का उत्पादन वर्ष 1950 में कुल चालीस हैक्टेयर भूमि में किया जाता था। इस समय एक लाख हैक्टेयर से भी अधिक भूमि पर सेब पैदा होता है।
हिमाचल प्रदेश के कुल 12 जिलों में से सात जिलों में सेब पैदा होता है। शिमला जिला सबसे बड़ा सेब उत्पादक जिला है। हिमाचल में फल उत्पादन के तहत कुल क्षेत्र में से 49 प्रतिशत सेब के अधीन है। यहां फलों के कुल उत्पादन में 85 फीसदी हिस्सा सेब का है।
रॉयल किस्म से विदेशी किस्मों तक
हिमाचल में सेब की परंपरागत रॉयल किस्म के अलावा सेब की विदेशी किस्में पैदा की जाती हैं। इनमें सुपरचीफ, स्कारलेट स्पर टू, वाशिंगटन स्पर, जेरोमाइन, रेड विलॉक्स, रेडलम गाला, स्कारलेट गाला, गेल गाला आदि किस्में सफलता से उगाई जा रही हैं।
शिमला के मेयर से लेकर नामी सर्जन तक उगाते हैं सेब
माकपा नेता व शिमला के मेयर संजय चौहान एक सफल बागवान भी हैं। शिमला के आईजीएमसी अस्पताल के सर्जरी विभाग के प्रोफेसर आरएस झोबटा भी कुशल बागवान हैं। पीजीआई चंडीगढ़ से सर्जरी की मास्टर डिग्री के बाद आईजीएमसी अस्पताल में सेवाएं देना शुरू की और इस समय प्रोफेसर रैंक के डॉक्टर हैं। इसके अलावा कई नामी हस्तियां सेब बागीचे वाली हैं।

यही नहीं, शिमला के बखोल गांव के युवा बागवान संजीव चौहान के नाम प्रति हैक्टेयर सेब उत्पादन का विश्व रिकार्ड भी है। सेब ने हिमाचल को इस कदर संपन्न किया है कि शिमला जिला के ऊपरी इलाकों में अधिकांश बागवान करोड़पति हैं।

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