अवैध सेब बागीचों को लेकर हाईकोर्ट की सख्ती

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हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने सरकारी वन भूमि पर अवैध कब्जा कर विकसित किए गए सेब बागीचों के संदर्भ में सख्ती दिखाते हुए दोहराया है कि एक ईंच भी अवैध कब्जा बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। अदालत ने स्पष्ट किया है कि सरकारी
वन भूमि पर अवैध सेब बागीचे लगाने के मामले में अब तक जितने भी आदेश पारित किए गए हैं, वे सभी वैसे के वैसे लागू रहेंगे। इसके साथ ही हाईकोर्ट ने प्रदेश सरकार को ताजा स्टेट्स रिपोर्ट भी अदालत में पेश करने के लिए कहा है। यहां बता दें कि इससे पहले भी हाइकोर्ट ने सख्ती के साथ कहा था कि किसी भी सूरत में अवैध कब्जे सहन नहीं किए जाएंगे। साथ ही अदालत ने यह भी कहा था कि 6 अप्रैल 2015 को पारित खंडपीठ के विभिन्न आदेशों में भी किसी तरह का संशोधन नहीं किया जायेगा। यहां बता दें कि 6
अप्रैल 2015 को हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति राजीव शर्मा व न्यायमूर्ति तरलोक सिंह चौहान की खंडपीठ ने राज्य सरकार को आदेश दिये थे कि 6 माह के भीतर सरकारी वन भूमि से अवैध कब्जों को हटाना सुनिश्चित करे। खंडपीठ ने इसके
अलावा कब्जाधारियों के बिजली-पानी कनेक्शन काटने के आदेश भी दिए थे।
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बड़ी मछलियों पर पहले करो कार्रवाई अलग-अलग समय में हाईकोर्ट के समक्ष यह जानकारी आई कि बड़ी मछलियों को
छेड़ा नहीं जा रहा और छोटे कब्जाधारियों को पहले निशाना बनाया जा रहा है। इस पर हाईकोर्ट ने प्रदेश सरकार को आदेश जारी किए थे कि सबसे पहले प्रभावशाली लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाए। अदालत ने राज्य सरकार को
आदेश दिए थे कि 10 बीघा से अधिक वन भूमि पर हुए कब्जे को 3 माह में हटाया जाए। कब्जाधारियों के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज करने को भी कहा गया था। अवैध कब्जे को लेकर जनहित याचिका में पारित आदेशों के दृष्टिगत हाइकोर्ट ने इस याचिका को रिकॉर्ड रूम में भेजने के आदेश दिए। साथ ही कहा कि इस आपराधिक याचिका में पारित आदेशों से अगर कोई प्रभावित है तो वह सक्षम न्यायलय में जा सकता है। अलबत्ता हाईकोर्ट ने सिंगल बैंच की तरफ से पारित आदेशों में किसी भी तरह का संशोधन नहीं किया है। एकल पीठ ने राज्य सरकार को यह आदेश दिए हैं कि 10 बीघा से अधिक वन भूमि छुड़ाने की तमाम प्रक्रिया 6 माह व इससे कम भूमी छुड़ाने की प्रक्रिया 1 साल में पूरी करे। हाईकोर्ट ने मामले से जुड़े सभी प्रतिवादियों को 22 मार्च तक
स्टेट्स रिपोर्ट दाखिल करने को कहा है।

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